कोरोना वायरस : कृत्रिम या प्राकृतिक आपदा
कोरोना वायरस इसकी शुरुआत चीन के वुहान प्रांत के एक मीट मार्केट से हुई।
कई लोगों का मानना है कि इस वायरस को ग्रहण करने की क्षमता मानव में विकसित नहीं थी क्योंकि मानव ने इस प्रकार के किसी भी वायरस से लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपने विकास काल में कभी विकसित नहीं की। चीन में यह सामान्य बात है कि वहां के लोग किसी भी प्रकार के जीव जंतु का सेवन करते हैं लेकिन हमें यह ध्यान देना चाहिए कि जब हम ऐसे किसी जीव जंतु का सेवन करते हैं जिसका हमने कभी भी पहले सेवन नहीं किया उसके अंदर उपस्थित रोगाणु और विषाणु हमारे शरीर में भी प्रवेश करते हैं। चीन में भी इस वायरस के फैलने का यही कारण है समुद्री जीव के द्वारा उपस्थित यह वायरस मानव में स्थानांतरित हुआ फिर यह एक श्रंखला के रूप में फैलता गया यह विश्व में इतनी तेजी से इसलिए फैला क्योंकि वुहान विश्व की चौराहे के रूप में माना जाता है समस्त मार्गों की उड़ाने यहीं से होकर आती जाती हैं इसलिए यह सभी देशों में बहुत तेजी से फैलता है। दूसरी बात यह सामने आ रही है की चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने इस आपदा को सर्वप्रथम स्वीकार ही नहीं किया कि यह किसी प्रकार की आता है उनके द्वारा की गई यह लापरवाही और इस बात को छुपाने के कारण यह और अत्याधिक तेजी से फैला। चीन में इस प्रकार के वायरस लड़ने की ना तो किसी भी प्रकार की तैयारी थी । और ना ही किस बात की आशंका किया इतनी बड़ी महामारी का रूप ले लेगा। इसका नियंत्रण लगभग असंभव सा प्रतीत हो रहा है। इस बात का दूसरा पक्ष यह भी है कि क्या यह मानव निर्मित आपदा है या एक प्राकृतिक आपदा है इस बात को समझने के लिए आपको सबसे पहले समझना चाहिए कि हम प्रकृति के साथ जो कुछ भी करते हैं प्रकृति उसका उल्टा सूत समेत वापस करती है हमारे द्वारा किया जा रहा प्रकृति का अत्याधिक दोहन और इकोसिस्टम मैं दिन प्रतिदिन व्यवधान उत्पन्न करना भी इसका कारण है।
अगर हम इस बात को ध्यान रखें की प्रकृति संतुलन के सिद्धांत पर कार्य करती है अगर एक पक्ष में अत्याधिक असंतुलन उत्पन्न होगा तो प्रकृति इसे संतुलित करने का प्रयास अवश्य करेगी वह किस रूप में करेगी यह जानना अत्याधिक आवश्यक है आज जो हमें कोरोनावायरस के रूप में एक प्राकृतिक आपदा दिख रही है यह हमारे द्वारा ही निर्मित किया गया है अगर हम प्रकृति के नियमों का उल्लंघन करेंगे ऐसे जीव जंतु जिसे हमारा सेवन करने के लिए नहीं बनाया गया है उनका अपने शौक के लिए सेवन करेंगे तो इसका दुष्परिणाम हमें अवश्य प्राप्त होगा वह जीव जंतु जो हमारे समक्ष हमारी सहायता करने के लिए उनका सेवन करना अत्यधिक हानिकारक होता है। मौसम में दिन प्रतिदिन हो रहा परिवर्तन भी इसका एक कारण है। अगर हम प्रकृति के ऊपर जनसंख्या के रूप में अत्याधिक रूप से असंतुलन उत्पन्न करेंगे क्षमता से अधिक मानव का निवास होगा तो प्रकृति अवश्य रूप से इसका विरोध करेगी। यह प्रकृति द्वारा किया जा रहा है एक संतुलन स्थापित करने का प्रयास है।
कोरोना वायरस को हमने स्वयं ही आमंत्रित किया है। और इसका नियंत्रण कहीं ना कहीं प्रकृति के द्वारा ही स्थापित होगा। जब यह संतुलन पूर्ण हो जाएगा तो यह वायरस स्वयं समाप्त हो जाएगा। इस वायरस की एक बात यह भी है कि यह अत्याधिक गर्मी में स्वयं समाप्त हो जाते तो भारत में इससे डरने की कोई आवश्यकता नहीं है आने वाले समय में यह भारत में नाम मात्र रूप से अपना प्रभाव दिखाएगा । अब समय है हमारे जागने का प्रकृति हमें जगाए इससे बेहतर है कि हमें खुद ही जाग जाना चाहिए। आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुंदर भविष्य देना ही हमारी जिम्मेदारी है।आवश्यकता से अधिक किसी भी चीज का दोहन हानिकारक होता है। यह बात सभी को मानना पड़ेगी।अगर हमें मानव सभ्यता को आने वाले आदिकाल के लिए सुरक्षित रखना है नहीं तो हमारा हाल भी डायनासोर के युग के समान होगा इसे प्राकृतिक स्वयं ही समाप्त कर देगी।
Our brain – strength or weakness
In human history we suffering a lot of problem emotionally mentally physically but the most common problem for mankind is uncontrolled thought .
In the beginning of homo sapiens we and all creature in the planet are equal in physically mentally biologically but after few time homo sapiens developed their brain and using to find the way of life.
A year by year century by century we develop the most powerful tool it’s call intelligent brain the brain make a difference between US and other creature in the planet.
But now we all are suffering because of brain some people are not happy and sad because their brain not warking what they want if you create a outstanding tool is your life how can you say it’s your enemy.
Because you are not using properly then you say I don’t control my thoughts and emotions everything you do it’s your decision you are thinking how can you blame somebody else.
We make artificial brain but if we are not using our own brain properly how can we say that we use artificial brain for betterment of mankind
Now our strength brain everybody make their weakness because of their ignorance of using properly on it
Now the problem is we think everything is going on according to us when it’s not happened bwe blame to our brain. And saying God why you know make me so perfect God not meet anybody to perfect it’s their choice to be the perfect what they want to using a tremendous to ol to our life is our brain
If we are understanding the functioning of our brain never blame to our brain doing something or not happened according to us.
भारत :- धर्मनिरपेक्ष या पंथनिरपेक्ष
ब्रिटिश राज खत्म होने के बाद भारत में परिस्थिति उत्पन्न हुई थी। भारत को निर्णय लेना था कि वह अपनी बहू संख्या आबादी के साथ जाए या अपनी आदिकाल से आ रही परंपरा सर्व धर्म समान की नीति के साथ आगे बढ़े ।भारत के संविधान निर्माताओं ने यह निर्णय लिया कि भारत का धर्म उसका संविधान होगा । वह सभी धर्म को समान रूप से आगे बढ़ने और उन्नति करने का मार्ग प्रदान करेगा , और सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करेगा ।।
संविधान में वर्णित अंग्रेजी भाषा में सेकुलर शब्द का अर्थ हिंदी में धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष दोनों होता है । तो यह प्रश्न उठता है कि भारत क्या है ? धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष । इस बात को समझने के लिए हम को सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि, पंथनिरपेक्ष, और धर्मनिरपेक्ष, होता क्या है?
पंथनिरपेक्ष=इसका आशय यह है कि कोई भी व्यक्ति या संस्था जोकि सरकार के अधीन है । अपने किसी भी निर्णय पर किसी पंथ का कोई भी प्रभाव नहीं पड़ने देगा । उसकी दृष्टि में सारे पंथ एक समान होंगे। और वह सारे धर्मों का सम्मान करेगा । और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगा । किसी धर्म या पंथ के विरुद्ध या उनकी नीति या आस्था के विरुद्ध किसी भी प्रकार का कार्य नहीं करेगा। यह भारतीय परंपरा के अनुसार है , पश्चिम में इसका अलग ही रूप सामने आता है जो कि इसके इतिहास के समांतर है।
धर्मनिरपेक्ष: : विश्व इतिहास में कई ऐसी घटनाएं हुई जिनकी प्रतिक्रिया स्वरूप इस शब्द की उत्पत्ति हुई । यूरोप की सभ्यता में जब चर्च का वर्चस्व था। तब वहां की कुरीतियों और कुशासन और अत्याचार के विरुद्ध वहां की जनता ने आवाज उठाई और एक क्रांति का जन्म हुआ । जिसे हम फ्रांस की क्रांति के नाम से जानते हैं । तब वहां की जनता ने धर्म को एक अलग ही रूप से वर्णित किया वहां की संस्थाओं और सरकारों में धर्म का कोई स्थान नहीं है । सारी संस्थाएं धर्म के विरोध के आधार पर ही खड़ी हुई हैं , इसलिए वहां धर्मनिरपेक्ष का अर्थ किसी भी धर्म और शासन और संस्था से अलग रखना ।
‘जब हमारी बुद्धिजीवी इस बात की वकालत करते हैं कि भारत धर्मनिरपेक्ष है तो हमें यह समझना आवश्यक है कि भारत के संविधान निर्माताओं के मन में इस बात को लेकर कोई भी प्रश्न नहीं था कि भारत किस प्रकार का शासन उपलब्ध कराएगा इसलिए उन्होंने इस शब्द का जिक्र संविधान या उसकी प्रस्तावना में नहीं किया। क्योंकि यह तो उसके निर्माण में ही छिपा हुआ था किंतु कुछ वर्षों पश्चात इस बात की आवश्यकता हुई कि कहीं कोई इस बात का गलत फायदा न उठा ले और जनता को गलतफहमी ना हो इसके लिए स्वर्गीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी ने संविधान के 42 में संशोधन के द्वारा samajwad aur secular शब्द को संविधान में जोड़ा अथातो उसकी प्रस्तावना में निहित किया। इसलिए भारत का धर्मनिरपेक्ष पश्चिम सभ्यता से बिल्कुल अलग है भारत के समाज में जो आज टकराव की स्थिति का जन्म कहां है वह इस बात को ना समझने से है गांधी जी द्वारा दिखाया गया मार्ग और उनके द्वारा किया गया आचरण ही भारत का धन निरपेक्ष है आधार व्यक्तिगत आधार पर धर्म और राष्ट्र के आधार पर धर्म के होने पर भेद है यह बात सच है कि भारत एक हिंदू बहुसंख्यक देश है किंतु सदियों से हमने धर्मनिरपेक्ष किस सिद्धांत का पालन किया हैजो लोग इस बात पर प्रश्न करते हैं कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष नहीं है उनको यह बात समझना अति आवश्यक है समाज में होने वाले अति सूक्ष्म तनाव के आधार पर एक पूरी सभ्यता को ही कटघरे में खड़ा कर देना उचित नहीं है भारत का समाज इस समय एक समुद्र मंथन के दौर से गुजर रहा है उम्मीद है अमृत अवश्य निकलेगा।।
अरविंद केजरीवाल = भारतीय राजनीति का “अभिमन्यु”
जब किसी समाज का स्थापित व्यवस्था से विश्वास उठ जाता है। और उसकी रोजमर्रा के कार्यों में होने वाली कठिनाई के लिए समाज के समस्त लोगों द्वारा एक ही विषय को जिम्मेदार ठहराया जाता है। तो यह स्थिति एक क्रांति को जन्म देती है ,भारत में वर्ष 2012 में ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हुई जब भारत की केंद्र सरकार से लोगों मैं निराशा और भविष्य के प्रति नकारात्मक भाव पैदा हुआ, जनता ने प्रतीकात्मक रूप से भ्रष्टाचार को अपने आक्रोश को व्यक्त करने के लिए चुना , लोगों को अन्ना हजारे के रूप में अपना नेतृत्वकर्ता दिखाई दिया । अन्ना की सैनिक पृष्ठभूमि और सामाजिक कार्यों से लोगों में उनके प्रति आदर का भाव उत्पन्न हुआ । इसी आंदोलन में जन्म हुआ, एक ऐसे नेता का जिसने अपने जीवन के आरंभिक काल में भारतीय राजस्व सेवा में कमिश्नर के रूप में कार्य किया और स्वच्छ छवि के प्रशासनिक लोक सेवक के रूप में अपनी जगह बनाई , अन्ना हजारे के आंदोलन के अंतिम समय में अरविंद केजरीवाल ने लोगों के सामने विकल्प के रूप में एक नई पार्टी को प्रस्तुत किया । जिसका नाम उन्होंने आम आदमी पार्टी रखा अन्ना के आंदोलन के कई साथी जो कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन संस्था में उनके सहयोगी थे। उनके साथ आए दिल्ली विधानसभा 2013 में इस पार्टी ने चुनाव में भाग लिया जनता ने विकल्प के तौर पर इस पार्टी को चुना, अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री पद के लिए नामांकित किए गए जिस पार्टी के विरुद्ध भ्रष्टाचार के लिए संघर्ष करते उन्होंने चुनाव जीता उसी पार्टी का साथ लेकर उन्होंने सरकार बनाएं और 49 दिन के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के चलते उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया । स्वयं को देश के स्तर का नेतृत्व समझने की भूल के चलते उन्हें लोक सभा 2014 के चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा वह स्वयं प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के विरुद्ध वाराणसी से चुनाव लड़ रहे थे । लेकिन उन्होंने स्वयं को भारतीय राजनीति में विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया यही उनकी दीर्घकालीन जीत थी 2015 दिल्ली विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने फिर से भाग लिया इस बार उन्होंने जनता से माफी मांगी और 5 साल निरंतर दिल्ली के विकास के लिए कार्य करने के लिए वोट मांगे जनता परंपरागत पार्टियों के भ्रष्टाचार और कुशासन के चलते विकल्प को आजमाने के लिए तैयार थी जनता ने 2015 में श्रीमान केजरीवाल को अपना अटूट प्यार और समर्थन दिया और उन्होंने 70 सदस्य विधानसभा में 67 आम पार्टी के सदस्य निर्वाचित हुए केजरीवाल ने अपनी महत्वाकांक्षाओं को जागृत रखा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निरंतर प्रहार करते रहे किंतु उनका यह दाव पर उल्टा साबित हो ही रहा था वह एकसमझदार राजनीतिक रूप से इस बात को समझ गए और उन्होंने दिल्ली के विकास और दिल्ली के लोगों की भलाई में अपना ध्यान केंद्रित किया दिल्ली में बिजली पानी और स्वास्थ्य अच्छा आदि क्षेत्रों में अच्छा कार्य हुआ केजरीवाल को जनता ने एक इमानदार और कुशल प्रशासक के रूप में स्वीकार किया कानूनी बाध्यताओं और दिल्ली के पूर्ण राज ना होने के बावजूद उन्होंने प्रशंसनीय कार्य किया जनता के सामने एक विकल्प के रूप में केजरीवाल सफल राजनीतिक साबित हुए , 2020 में हुए दिल्ली विधानसभा के चुनाव में जनता ने उनके परिश्रम का अच्छा फल उन्हें दिया । निरंतर तीसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में वह शपथ लेने जा रहे हैं यह इस बात को साबित करता है। कि आगामी वर्षों में वह केंद्रीय स्तर पर एक विकल्प के रूप में अवश्य प्रस्तुत होंगे क्योंकि उन्होंने देश की सबसे पुरानी पार्टी को लगातार दूसरी बार विलुप्त कर दिया । और देश की सबसे बड़ी पार्टी और इस वक्त सबसे ताकतवर नेता नरेंद्र मोदी को परास्त किया जोकि किसी साधारण नेता के द्वारा किया गया, असाधारण कार्य है केजरीवाल की छवि जनता के रूप में एक साधारण व्यक्ति के रूप में है जो कि उनकी सबसे बड़ी ताकत है । विचारधारा के रूप में स्पष्ट ना होने के बावजूद यह पार्टी जनता में बहुत लोकप्रिय है । केजरीवाल भविष्य में कितने बड़े राजनेता साबित होंगे और यह प्रयास कितना सफल होगा या वक्त ही बताएगा?
अरविंद केजरीवाल: राजनीति का अभिमन्यु
जनता का भरोसा जब संस्था, सरकार या फिर किसी स्थापित व्यवस्था से उठ जाता है ।तो वह एक क्रांति का स्वरूप ले लेता है इस बात का सबसे उत्तम उदाहरण है वर्ष 2012 में अन्ना हजारे का आंदोलन जब जनता का कांग्रेस के प्रति आक्रोश सड़कों पर नजर आया थाजनता ने जिस बात पर अपना आक्रोश प्रतीत किया था भारत में लोकपाल को स्थापित करने से था लेकिन यह मात्र प्रतीक था कारण कुछ और था जनता बेरोजगारी महंगाई और भ्रष्टाचार से तंग आ चुकी थी भारतीय समाज का प्राचीन काल से ही स्वभाव नेतृत्व के लिए किसी व्यक्ति पर निर्भर रहती है जनता को अन्ना हजारे के रूप में महात्मा गांधी का स्वरूप नजर आया उनके सैनिक पृष्ठभूमि और सामाजिक कार्यों से जनता मोहित हो गई एक विशाल आंदोलन का स्वरूप ले लिया जनता के इस आक्रोश ने,
हिंदुत्व: धर्म या जीवन पद्धति
आज के आधुनिक भारत में प्रश्न उठता है कि हिंदुत्व क्या है सिर्फ एक धर्म या उस धर्म से भी बढ़कर मनुष्य के जीने का तरीक़ा प्राचीन भारत में आदिकाल से ही मनुष्य के अस्तित्व में आने की एक विशिष्ट पहचान थी उसे लोगों ने धर्म का नाम दिया धर्म अर्थात ईश्वर पर आस्था समर्पण प्रदर्शित करने का एक मार्ग ऋषि-मुनियों ने तपस्या यज्ञ और योग साधना के द्वारा ईश्वर से संपर्क स्थापित करने का मार्ग खोजा जिससे हिंदू धर्म का अविष्कार हुआ हिंदू धर्म कई मार्गों में चलकर विभाजित हुआ उसके कई प्रकार सामने आए वैष्णव धर्म शैव धर्म निरंकारी पंथ अलौकिक ईश्वर आदि आधुनिक भारत की युवाओं को इस बात से अवश्य रूप से परिचित होना चाहिए की सबसे प्राचीन धर्म हिंदू का नाम आधुनिक स्वरूप में दिया गया प्राचीन काल में सिर्फ एक ही प्रथा थी जिसका लोग निर्वहन करते थे सर्वप्रथम ईरान के निवासियों ने सिंधु नदी के तट पर निवास करने वाले मनुष्य की प्रजाति को हिंदू का इसका कारण यह था कि यूनानी भाषा में सा को हा के रूप में उच्चारित किया जाता था हिंदू एक धर्म है और हिंदुत्व एक जीने की पद्धति हिंदुत्व का धर्म से आस्था से किसी भी प्रकार का कोई रिश्ता नहीं है हिंदुत्व विचारों का आदर्शों का एक समावेश है जबकि हिंदू धर्म ईश्वर के प्रति आस्था व्यक्त करने का एक मार्ग हिंदुत्व के मार्ग पर चलकर हम स्वयं का आंतरिक और बाहरी रूप से विकास कर सकते हैं हिंदुत्व कभी किसी धर्म का अपमान करना या फिर किसी धर्म का पालन करने के लिए हमें आदेशित नहीं करता योग हिंदुत्व का ही एक प्रकार है जिसका धर्म जाति संप्रदाय से कोई लेना-देना नहीं हिंदुत्व मानव विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है हिंदुत्व त्याग परिश्रम और सत्कर्म के लिए मनुष्य को अग्रेषित करता है
The Journey Begins
Thanks for joining me!
Good company in a journey makes the way seem shorter. — Izaak Walton
